इलाज नहीं करा सकते तो मुझे जहर का इंजेक्शन दे दो-87 वर्षीय बापू आशाराम

इलाज नहीं करा सकते तो मुझे जहर का इंजेक्शन दे दो-87 वर्षीय बापू आशाराम

"मुझे जहर का इंजेक्शन दे दो..." जोधपुर सेंट्रल जेल में दर्द से तड़प रहे बापू आशाराम, निजी डॉक्टर भोला ने जेल प्रशासन पर लगाए हत्या की साजिश के गंभीर आरोप

जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद 87 वर्षीय बापू आशाराम के स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर खबर सामने आई है। उनके निजी डॉक्टर भोला ने जेल प्रशासन पर लापरवाही और एक गहरी साजिश रचने का आरोप लगाया है। डॉक्टर भोला का दावा है कि बापू आशाराम जेल में एक गंभीर और जानलेवा बीमारी से तड़प रहे हैं, लेकिन उन्हें न्यायालय के आदेशों के बावजूद उचित आयुर्वेदिक इलाज नहीं दिया जा रहा है। दर्द से बेहाल होकर बापू आशाराम ने यहाँ तक कह दिया है कि "अगर मेरा इलाज नहीं करवा सकते, तो मुझे यहीं जहर का इंजेक्शन दे दो।"

रात 10 बजे की मेडिकल इमरजेंसी और जेल की बदहाली

डॉक्टर भोला ने घटना का विवरण देते हुए बताया कि रात करीब 10 बजे उनके पास जेल से एक इमरजेंसी कॉल आई। बापू आशाराम को 'ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया' (Trigeminal Neuralgia) का भयंकर अटैक आया था। आयुर्वेद में इसे 'त्रिनाड़ी शूल' कहा जाता है, जो दुनिया के सबसे भयंकर दर्दों में से एक है, जिसे मेडिकल साइंस में 'सुसाइड डिसीज' (Suicide Disease) भी कहते हैं।
डॉक्टर भोला जब भागे-भागे सेंट्रल जेल पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि बापू आशाराम दर्द से तड़प रहे थे, उनके हाथ-पैर चल रहे थे, पसीना आ रहा था और ब्लड प्रेशर (BP) खतरनाक स्तर तक बढ़ चुका था। डॉक्टर भोला का आरोप है कि इतनी बड़ी इमरजेंसी के वक्त जेल के अस्पताल में न तो कोई ड्यूटी डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई नर्सिंग स्टाफ।

एलोपैथिक दर्द निवारक पर रोक, फिर भी आयुर्वेदिक इलाज से इनकार
डॉक्टर भोला ने बताया कि दिल्ली एम्स (AIIMS) के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट ने बापू आशाराम को एलोपैथिक दर्द निवारक (Painkillers) देने से सख्त मना किया है, क्योंकि इससे उनके हाथों और पेट में रक्तस्राव (Internal Bleeding) का खतरा है। ऐसे में इस असहनीय दर्द को केवल आयुर्वेदिक 'शिरोधारा' और पंचकर्म के जरिए ही नियंत्रित किया जा सकता है, जिसकी सुविधा 'आरोग्यम' अस्पताल में उपलब्ध है।
सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट ने भी अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि उन्हें अपनी पसंद के मेडिकल केयरगिवर से इलाज लेने का अधिकार है। इसके बावजूद, जेल अधीक्षक और जेल के डॉक्टर उन्हें आरोग्यम अस्पताल शिफ्ट करने से साफ इनकार कर रहे हैं और जबरन एम्स भेजने की बात कर रहे हैं। एसपी स्तर के अधिकारियों ने तो इस इमरजेंसी के वक्त फोन तक उठाने से मना कर दिया।

"यह कोई सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि गहरी साजिश है"
बापू आशाराम के निजी चिकित्सक ने जेल प्रशासन, विशेषकर डीजी जेल और सुपरिंटेंडेंट की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। डॉक्टर भोला ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा, "यह निरा अत्याचार और तानाशाही है। ऐसा लगता है कि यह एक सोची-समझी गहरी साजिश है। जेल प्रशासन जानबूझकर उन पर इतना दबाव और प्रताड़ना डाल रहा है ताकि दर्द और तनाव के कारण उन्हें हार्ट अटैक आ जाए और जेल के अंदर ही उनकी जान चली जाए।"

दर्द से आहत संत के मार्मिक शब्द

जेल प्रशासन की इस अमानवीयता और अपने असहनीय दर्द से टूट चुके 87 वर्षीय बापू आशाराम ने बीती रात निराशा में जो कहा, वह किसी को भी विचलित कर सकता है। डॉक्टर भोला के मुताबिक, तड़पते हुए बापू जी ने तीन-चार बार कहा, "यार, अगर तुम लोग मेरा इलाज नहीं करवा सकते हो, मुझे आरोग्यम नहीं भेज सकते, तो एक काम करो, मुझे जहर का इंजेक्शन लगा दो। मुझे यहीं मार दो, मैं तैयार हूँ।"
डॉक्टर भोला की इन सनसनीखेज चेतावनियों के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या देश की जेलों में बुजुर्ग और बीमार कैदियों के मानवाधिकारों का कोई मोल नहीं है? और क्या न्यायपालिका के आदेशों की इस तरह खुलेआम अवमानना करने वाले जेल अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी?